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बारीक चावल 1509 के दामों में 500 रूपये की ओर तेजी

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(सुभाष भारती):
पिछले एक सप्ताह में बारीक चावल में 300 रूपये प्रति किवंटल की 1509 प्रजाति के सेला व स्टील चावल में तेजी आ चुकी है। इसके साथ-साथ अन्य किस्म के चावलों में भी तेजी का रूख बना हुआ है तथा अस्थायी मंदी के बाद अब 500 रूपये की ओर तेजी दिखाई दे रही है।
ताजा सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक उत्पादक मंडियों में धान की आवक एवं पुराने माल की स्टाक स्थिति को देखते हुए इस बार आगे भी तेजी कायम रहने की संभावना है तथा निर्यात की समर्थन पहले की तरह मिला तो यह एक दशक पहले की रिकार्ड तेजी वाला भाव भी दोहरा सकता है। यही नहीं, मोटे धान की स्थिति भी उत्पादक क्षेत्रों से बढिय़ा नहीं आ रही है। अत: मोटे किस्म के चावल में भी भरपूर तेजी रहने की संभावना बनी हुई है। बारीक चावल में तेजी-मंदी उत्पादन की बजाये निर्यातकों की लिवाली पर निर्भर करती है। अंतराष्ट्रीय बाजारों में ऊँचे भाव सेला, स्टीम व कच्चे बासमती चावल के चल रहे हैं, जिससे दो दिनों के अंतराल ही 300 रूपये बढक़र 1509 सेला 6300 रूपये एवं स्टीम 7200 रूपये बिक गया। इसकी लैंथ व पकाई बढिय़ा होने एवं 1121 के भाव की तुलना में काफी नीचे होने से निर्यातक एवं आयातक दोनों ही लिवाली में आ गये हैं जिससे इसमें 500 रूपये की ओर तेजी के आसार बन गये हैं। इसके इलावा अन्य बारीक चावल भी तेज रहेंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक धान की रोपाई बारीक व मोटे किस्म के 440 लाख हैक्टेयर के करीब हुई थी जो गत वर्ष के लगभग समान ही रहा। इन सबके बावजूद अगस्त के महीने में इस बार पूर्व से हवा नहीं बहने से धान की ग्रोथ कम रही तथा सितम्बर के महीने में ही बरसात का पलायन हो गया जिसके चलते उत्पादकता में अनुमान से कहीं बहुत अधिक मिलिंग के बाद 1509, 1408, 1401 एवं 1121 प्रजाति वाले बासमती चावल कम निकल रहे है तथा पहले से ब्रोकन भी अधिक निकलने लगा है। यही कारण है कि राइस मिलें सेला, स्टीम व कच्चा चावल बाजार में मांग के अनुरूप देने में असमर्थ हो गई हैं। बाजार पर निर्यातकों का पूरी तरह से कब्जा हो गया है। इस बार बारीक धान का उत्पादन 600 लाख टन से घटकर 400 लाख टन रह जाने का अनुमान है, जिसमें 235-240 मीट्रिक टन विभिन्न तरह के बारीक प्रजाति के चावल की सकल उपलब्धि हो पायेगी। पुराना स्टाक पहले से ही नहीं था तथा फसल में भारी कमी आ गई, जिसके चलते बाजार रूक-रूककर उछाल मार रहा है। अत: इसी को देखते हुए 500 रूपये प्रति क्विंटल की ओर तेजी आने का आभास हो रहा है।


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