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धान में बढ़ी नमी ने किसानों व आढ़तियों का निकाला पसीना

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सुनाम, (सुभाष भारती):
सरकार द्वारा धान में निर्धारित मात्रा 17 प्रतिशत नमी से अधिक होने से किसानों व आढतियों के पसीने छूटने लगे हैं। अधिक नमी से परेशान किसानों के समक्ष आगे कुआं, पीछे खाई वाले हालात बन गए हैं। धान को सुखाने का भरसक प्रयास करने के बावजूद नमी की मात्रा कम होने का नाम नहीं ले रही है जबकि शैलर उद्योग से जुड़े कारोबारी सरकार द्वारा तय मापदंड पर खरा उतरने वाले धान को ही उठा रहे हैं। ऐसे में किसान के समक्ष अब धान के वजन पर कट लगवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है लेकिन इस स्थिति में किसानों का भारी आर्थिक नुक्सान होगा जबकि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में धान का झाड कम निकला है। किसानों का तर्क है कि इससे उन पर दोहरी मार पड़ रही है। लिहाजा, सरकार इस मामले में दखल देकर नमी की मात्रा में अतिरिक्त छूट देकर किसानों को राहत दे।
व्यापार समीक्षा की टीम द्वारा जब स्थानीय अनाज मंडी का दौरा किया तो देखा गया कि कई किसान अपने धान को मंडी के फर्श पर बिछाकर सुखाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन धान में नमी की मात्रा कम नहीं हो रही। किसान प्यारा सिंह, परमजीत सिंह ने बताया कि उसने सूखा धान काटा है लेकिन यहां आकर जब खाद्य अधिकारीयों ने जांच की तो धान में 24 प्रतिशत नमी की मात्रा पाई गई। धान को सूखाने की कोशिश के बाद भी नमी का मात्रा 22 प्रतिशत आ रही है। किसानों ने कहा कि अगर उन्होंने अपना धान बेचना है तो उन्हें धान के वजन पर कट लगवाना पड़ेगा, जिससे उनका भारी आर्थिक नुक्सान होगा जबकि इस बार धान का झाड कम निकला है। दूसरी तरफ भाजपा नेता व आढ़ती शंकर बांसल का कहना है कि धान में सरकारी मापदंडों से अधिक नमी होने के कारण धान की खरीद न होने से आढ़ती भी बेहद परेशान हैं क्योंकि आढ़तियों को किसान द्वारा लाई गई धान का रखरखाव करना पड़ता है और धान न बिकने के हालात में उनका भी आर्थिक नुक्सान हो रहा है।

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