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किसानों, मिलरों को आ रही परेशानी को हल करने के लिए सरकार तुरन्त हरकत में आये

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मोगा, (सुभाष भारती):
पंजाब सरकार द्वारा धान बिजाई का समय लेट किये जाने के कारण फसल पकने में देरी हुई और मौसम के खराब होने के कारण अब धान में नमी की मात्रा कम नहीं हो पा रही जिस कारण आढ़ती, किसान व राइस मिलर्स सभी परेशान हैं। धान न सूखने के कारण खाद्य एजेंसियां धान को खरीदने में आनाकानी कर रही हैं।
इस बारे में राज्य के प्रमुख राइस मिलर सुनील मित्तल का कहना है कि खरीफ सीजन की 2018-19 की प्रमुख फसल धान जो पक कर तैयार है, खराब मौसम के कारण धान में नमी की मात्रा 21 प्रतिशत से अधिक आ रही है। सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी रेट 1770 रूपये प्रति किवंटल 17 प्रतिशत नमी वाले धान का है। मंडी में आ रहे धान में कोई ही ढेरी ऐसी मिलेगी जो 17 प्रतिशत नमी वाली हो। इसमें दोष किसान का नहीं है कि वे 17 प्रतिशत नमी वाला धान मंडी में लाना चाहता है लेकिन मौसम के खराब होने के कारण धान सूख नहीं रहा है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस वर्ष के लिए धान में नमी की मात्रा 20 प्रतिशत करे, 3 प्रतिशत नमी का रेट घटाकर 1716.90 रूपये कर देना चाहिए तथा मिलिंग करने वाले राइस मिलर्स को एक प्रतिशत ड्राइज की जगह 4 प्रतिशत कर देनी चाहिए। ऐसा करने से किसी का भी कोई आर्थिक नुक्सान नहीं होगा, चाहे वह किसान है, चाहे वह शैलर वाला हो और चाहे सरकार ही क्यों न हो? इस प्रकार से राहत देकर हम देश के किसान, किसानी व राइस उद्योग को अच्छी कवालिटी के अनाज के भण्डारों को बचा सकते हैं।

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