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एशिया की मंडियों में भारतीय चावल मंदा- नई फसल की आवक से थाई चावल के दाम घटे

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(सुभाष भारती):
एक सप्ताह पूर्व की तुलना में बीते सप्ताह शीर्ष एशियाई चावल निर्यातक देशों भारत एवं थाईलैंड में मांग का अभाव बना रहा क्योंकि नये निर्यात ऑर्डर चुनिंदा ही आ रहे हैं। दूसरी ओर उत्पादन बढऩे तथा बाहट मजबूत होने के कारण थाई बाजार भी दबाव में आ गए।
विश्व के सबसे बड़े निर्यातक भारत का 5 प्रतिशत टुकड़ा पारबॉयल्ड चावल बीते सप्ताह में 378-383 डॉलर प्रति टन पर आ गया। इससे पूर्व सप्ताह में यह कीमत 380-385 डॉलर थी। भारतीय चावल की कीमत में आई नवीनतम मंदी का प्रमुख कारण यह है कि रूपये का मूल्यह्लासन हुआ है। एक निर्यातक ने कहा कि मांग मामूली बनी हुई है। रूपये के कमजोर पडऩे से कीमत भी घट रही है। गौरतलब है कि डॉलर की तुलना में रूपया इस वर्ष अभी तक करीब 2 प्रतिशत कमजोर हो चुका है।
खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते जून महीने में चावल के आयात पर टैक्स लगाये जाने के कारण जुलाई-फरवरी अवधि में पड़ौसी देश बंगलादेश का आयात कमजोर होकर 1.37 लाख टन के स्तर पर आ गया। बाढ़ के कारण स्थानीय फसलें प्रभावित होने के बाद वर्ष 2017 में चावल के एक प्रमुख आयातक के तौर पर उभरने वाले बंगलादेश ने उत्पादन बढऩे के बाद अपने किसानों को समर्थन प्रदान करने के लिए इसके आयात पर 28 प्रतिशत डयूटी लागू कर दी थी। जून-2018 में खत्म हुए वित्त वर्ष 2017-18 में बंगलादेश ने रिकार्ड 39 लाख टन चावल का आयात किया था।
बहरहाल, वियतनाम का 5 प्रतिशत टुकड़ा चावल बीते सप्ताह के 340 डॉलर की तुलना में बीते सप्ताह में तेज होकर 345 डॉलर प्रति टन हो गया। यहां स्थित एक कारोबारी ने कहा कि स्टॉक के लिए सरकार द्वारा किसानों से चावल की खरीद किए जाने की घोषणा किए जाने के बाद कीमत में सुधार हुआ है। गत सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन सरकार के जनरल स्टेस्टिक्स कार्यालय ने कहा था कि एक वर्ष पूर्व की तुलना में जनवरी-फरवरी में वियतनाम का चावल निर्यात 4.90 लाख टन रहा। कार्यालय ने आगे बताया कि आलोच्य अवधि में चावल से प्राप्त निर्यात 17.50 प्रतिशत गिरकर 33.50 करोड़ डॉलर रही।
जीएसओ ने कहा कि थाईलैंड के बाद विश्व में तीसरे सबसे बड़े निर्यातक वियतनाम से फरवरी महीने के दौरान 14 करोड़ डॉलर कीमत के 3.50 लाख टन चावल का निर्यात हुआ।
थाईलैंड का 5 प्रतिशत टुकड़ा चावल फ्री ऑन बोर्ड बैंकॉक आधार पर मंदा होकर 383-398 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गया। इससे पूर्व सप्ताह यह कीमत 383-405 डॉलर थी। कारोबारियों ने बताया कि बाजार में नई फसल की आवक होने से चावल की कीमत मामूली घटी है जबकि मांग सुस्त बनी हुई है। यहां स्थित एक कारोबारी ने कहा कि निर्यातक तुलनात्मक रूप से नीची कीमत पर चावल की बिक्री कर रहे हैं लेकिन फिल्हान कोई सौदा नहीं होने के कारण इसकी कीमत पर असर हो रहा है। उन्होंने आगे बताया कि निर्यातकों को अभी भी फिलीपींस से बड़े ऑडर मिलने की उम्मीद है। डॉलर की तुलना में स्थानीय मुद्रा मजबूत होने के कारण थाई चावल का निर्यात आकर्षक नहीं रह गया है।
बैंकाक स्थित एक चावल कारोबारी ने कहा कि नई आवक की वजह से कीमत तुलनात्मक रूप से नीची बनी हुई है लेकिन बाहट मजबूत होने और मांग का अभाव बना रहने से निर्यातकों के लिए चिंता के दो कारण हैं।


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