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एफ.सी.आई. की चावल लगवाने की कछुआ चाल ने पंजाब की इंडस्ट्री को किया तबाह: बिंटा

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श्री मुक्तसर साहिब (सुभाष भारती):
एफ.सी.आई. की तरफ से चावल लगवाने की कछुआ चाल ने चावल इंडस्ट्री को पूरी तरह तबाही के किनारे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिस कारण राज्य के राइस मिलरों में भारी रोष पाया जा रहा है। यह प्रकटावा पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष भारत भूषण बिंटा ने प्रैस के साथ बातचीत करते किया। उन्होंने बताया कि इस मसले संबंधी ही फेडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय स्तरीय मीटिंग 23 फरवरी को पटियाला में हो रही है जिसमें चावल इंडस्ट्री को पेश आ रही समस्याओं पर विचार-विमर्श किया जायेगा।
एफ.सी.आई. में फैले कथित भ्रष्टाचार के कारण ही आज राज्य की राइस इंडस्ट्री तबाही के किनारे पर पहुँच चुकी है और केंद्र सरकार को एफ.सी.आई. में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी चाहिए। केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में शैलर इंडस्ट्री को बचाने की बिल्कुल कोशिश नहीं की गई, जबकि पिछले वर्षों में चावल उद्योग का खर्चा 8 से 10 गुणा बढ़ चुका है और चावलों की कई किस्में भी बदल गई हैं, जिन से चावल निकालने की मात्रा काफी कम हो गई है। प्रदेश उपप्रधान बिंटा ने बताया कि पिछले 30 वर्षों से चावल मिलिंग का रेट सरकार की तरफ केवल 10 रुपए प्रति क्विंटल ही मिलर्स को अदा किया जा रहा है, जबकि बिजली और अन्य खर्च किए कई गुणा बढ़ चुके हैं। केंद्र सरकार का रवैया शैलर इंडस्ट्री प्रति काफी निराशाजनक रहा है। पिन पुआइंट डैमेज चावल, जोकि खाने योग्य है, इसलिए पिन पुआइंट डैमेज चावल को खाने योग्य माना जाये जिसकी कई वर्षों से माँग है और उसे सपैसीफिकेशन में भी सही माना जाना चाहिए। बिंटा ने कहा कि पटियाला में होने वाली राष्ट्रीय फेडरेशन की मीटिंग में देश के 19 राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जोकि भारत के समूह राइस मिलरों को आ रही समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल्द ही चावल उद्योग को संभाला न गया तो वह दिन दूर नहीं जब किसानी के सामने भी एक गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।


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