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मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला: आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्ण वर्ग को मिला 10 प्रतिशत आरक्षण

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नई दिल्ली, (सुभाष भारती):
      मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने सवर्ण जातियों को 10 फीसद आरक्षण के फैसले पर मुहर लगा दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट की बैठक के बाद ये जानकारी दी। एसएसटी एक्ट पर मोदी सरकार के फैसले के बाद सवर्ण जातियों में नाराजगी और हाल के विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों में मिली हार के मद्देनजर इसे सवर्णों को अपने पाले में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि आज ही मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है। बता दें कि आज संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है।
      राजनीतिक पंडितों ने अनुसार, मोदी सरकार के इस फैसले ने राफेल सौदे और किसानों की कर्जमाफी जैसे मुद्दों की हवा निकाल दी है। ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले के दूरगामी राजनीतिक परिणाम देखने को मिलेंगे। कुछ और जातियां भी लोकसभा चुनाव से पहले आरक्षण की मांग कर सकती हैं।

राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन और बढ़ी
     सवर्णों को आरक्षण दिये जाने वाले विधेयक को पारित करवाने के लिए राज्यसभा की कार्यवाही की अवधि एक दिन के लिए और बढ़ा दी गई है। जबकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सदन की कार्यवाही आठ जनवरी यानी आज ही स्थगित होने वाली थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही विधेयक को मंजूरी दी है, जिसे हर हाल में इसी सत्र में पारित करवाने का प्रयास किया जाएगा। विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके उसी दिन पास हो जाने की संभावना है। राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सभी दलों से विचार-विमर्श कर अवधि एक दिन ओर बढ़ा दी है।
     बता दें कि इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण जातियों को आरक्षण दिया जाएगा। केंद्र सरकार का यह एक ऐतिहासिक फैसला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया है। बता दें कि कई राज्यों में सवर्ण आरक्षण की मांग करते आ रहे हैं। हाल में तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को मिली हार के बाद इस फैसले की अहमियत और बढ़ जाती है।
     भाजपा नेता शहनवाज हुसैन ने इसे मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि गरीब स्वर्ण समुदाय लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। पीएम मोदी ने उनकी इस मांग को मानकर समाज को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्यों में पहले ही अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 22 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।

सरकार ऐसे देगी सवर्णों को आरक्षण
     मोदी सरकार सवर्णों को आरक्षण देने के लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा। दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा। बता दें कि पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करने का आदेश दिया था तब देशभर में दलितों ने काफी प्रदर्शन किया था। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले से सवर्ण काफी नाराज हो गए, दलितों के बंद के बाद सवर्णों ने भी भारत बंद का आह्वान किया था।

क्या कहता है अनुच्छेद 15
      संविधान में अनुच्छेद 15 केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान, या इनमें से किसी के ही आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है। अंशत: या पूर्णत: राज्य के कोष से संचालित सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों या सार्वजनिक रिसोर्ट में निशुल्क प्रवेश के संबंध में यह अधिकार राज्य के साथ-साथ निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी प्रवर्तनीय है। हालांकि, राज्य को महिलाओं और बच्चों या अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति सहित सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के नागरिकों के लिए विशेष प्रावधान बनाने से राज्य को रोका नहीं गया है। इस अपवाद का प्रावधान इसलिए किया गया है, क्योंकि इसमें वर्णित वर्गों के लोग वंचित माने जाते हैं और उनको विशेष संरक्षण की आवश्यकता है।

अनुच्देद 16 में ये हैं प्रावधान
      अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार के संबंध में अवसर की समानता की गारंटी देता है और राज्य को किसी के भी खिलाफ केवल धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान या इनमें से किसी एक के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है। किसी भी पिछड़े वर्ग के नागरिकों का सार्वजनिक सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनुश्चित करने के लिए उनके लाभार्थ सकारात्मक कार्रवाई के उपायों के कार्यान्वयन हेतु अपवाद बनाए जाते हैं, साथ ही किसी धार्मिक संस्थान के एक पद को उस धर्म का अनुसरण करने वाले व्यक्ति के लिए आरक्षित किया जाता है।

इन सवर्णों को मिलेगा आरक्षण का लाभ
   ये होंगे मानक जिनके तहत मोदी सरकार ये आरक्षण की सुविधा दी जाएगी। 
1- सालाना आय 8 लाख से कम हो।
2- 5 एकड़ से कम खेती की जमीन हो।
3- 1000 स्क्वेयर फीट से कम का घर हो।
4- निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन।
5- 209 गज से कम की निगम की गैर-अधिसूचित जमीन हो और जो अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते हों।


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