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आज वाराणसी में अन्तर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र का उदघाटन करेंगे मोदी

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वाराणसी, (व्यापार समीक्षा संवाददाता):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन करेंगे। इस स्वर्णिम परियोजना से पूर्वांचल समेत पूरे देश के किसानों को काफी लाभ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बीज अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र परिसर स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान एवं दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र का लोकार्पण करेंगे। यह केंद्र दक्षिण एशिया और दक्षेस क्षेत्र में चावल अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए एक बड़ा केंद्र बनेगा।  पूर्वी भारत में पहले अंतरराष्ट्रीय केंद्र से पूर्वांचल समेत पूर्वी क्षेत्र में चावल के उत्पादन को कम लागत और श्रम में अच्छी पैदावार बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। साथ ही विलुप्त होती चावल की प्रजातियों को भी संरक्षित करेगा। 
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र (आईआरआरआई)के महानिदेशक डॉ. मैथ्यू मोरेल ने बताया कि फिलिपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला केंद्र किसानों की आय बढ़ाने में और चावल की उत्कृष्ट उत्पादकता साबित करने में मददगार होगा। इससे चावल की उत्पादकता बढ़ेगी तथा यह किसानों को कुशल एवं रोजगार आधारित बनाएगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से इसी वर्ष जुलाई में आईआरआरआई ने वाराणसी में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। डॉ. मैथ्यू के अनुसार वाराणसी में स्थापित होने वाले दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय केंद्र में शोध और प्रदर्शन कार्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
इस केंद्र के माध्यम से पूर्वी भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में ऐसे चावल का उत्पादन बढ़ाया जाएगा, जिसमें आर्सेनिक और भारी धातुओं की कमी हो और खनिज तत्व ज्यादा हों। इस तरह से पूर्वी भारत में कुपोषण की समस्या से निपटा जा सकेगा। गौरतलब है कि पूर्वी और दक्षिणी भारत में चावल मुख्य खाद्य पदार्थ है।  केंद्र के वाराणसी में निदेशक डॉ. उमा शंकर सिंह ने बताया कि वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, मऊ, सोनभद्र, भदोही समेत पूर्वांचल में लगभग दस लाख हेक्टेयर से ज्यादा खेतों में चावल का उत्पादन होता है। मगर कई बार मिट्टी की गुणवत्ता एवं जलवायु परिवर्तन के चलते पैदावार में कमी आ जाती है। 
इस शोध केंद्र के जरिये उन्नत किस्म के चावल की पैदावार हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का फायदा न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत से जुड़े राज्यों को होगा। इस अनुसंधान केंद्र में काला नमक, राजरानी, बादशाह पसंद, काला चावल जैसी उत्कृष्ट प्रजातियों की उत्पादकता पर शोध होगा। इसके अलावा पूर्वांचल के जलवायु एवं मिट्टी में उपजाऊ होने वाली श्रीराम भोग, सुगंधा, बासमती, मंसूरी समेत अन्य हाइब्रिड प्रजातियों की गुणवत्ता, पैदावार, स्वाद, खुशबू, पौष्टिकता आदि बढ़ाने पर भी शोध किए जाएंगे।


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