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बैंक और बीमा कंपनियां नहीं कर सकेंगी मनमानी-सीवीसी करेगी जांच

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नई दिल्ली, (व्यापार समीक्षा संवाददाता):
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सरकारी बीमा कंपनियों और बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों का पता लगाने के लिए उनकी ऑडिट रिपोर्ट की जांच-पड़ताल का फैसला किया है। केंद्रीय सतर्कता आयोग पड़ताल के बाद सुधारात्मक उपायों से जुड़े सुझाव भी देगा। बैंकों में लगातार बढ़ रहे एनपीए (अवरुद्ध) और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले सामने आने को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण है। 
सतर्कता आयुक्त टी.एम. भसीन ने कहा कि सीवीसी केंद्रीय सांविधिक रिपोर्टों, मौजूदा लेखा परीक्षकों (ऑडिटर) की रिपोर्टों और अन्य लेखा परीक्षक की रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा है। यह काम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लेखा परीक्षा रिपोर्टों की जांच-परख आयोग में भी की जा रही है और सुधारात्मक कार्य योजना के समयबद्ध कार्यान्वयन के लिये सलाह भी दी जा रही है। सरकारी संगठनों में तैनात केंद्रीय सतर्कता अधिकारी वहां भ्रष्टाचार और अन्य धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की रोकथाम के लिए वहां सीवीसी के अंग के रूप में काम करते हैं।

- घोटाले-धोखाधड़ी के मामलों से चिंता
वित्त मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और निजी बैंकों में 2017-18 में धोखाधड़ी के कुल 8,802 मामले सामने आये हैं। 2016-17 में 7,794 और 2015-16 में 7,482 मामले सामने आये थे।

- आरबीआई करता है निगरानी
आरबीआई बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों की निगरानी करता है। धोखाधड़ी के जोखिम से बचने के उपायों और कर्ज बांटने में गड़बड़ी के मामलों का समय रहते पता लगाने के लिए आरबीआई ने सख्ती की है। साथ ही इसकी जल्द से जल्द सूचना जांच एजेंसियों को देकर जिम्मेदार कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई भी तेज की है। उसने कर्ज में धोखाधड़ी और बेहद जोखिम वाले खातों से निपटारे के लिए भी नया तंत्र बनाया है। 50 करोड़ रुपये या उससे ऊपर के कर्ज में गड़बड़ी के मामलों में तुरंत कार्रवाई के निर्देश हैं। 

- इसलिए पड़ी जरूरत
* आरबीआई और बैंकों के अंदरूनी निगरानी के बाद भी पीएनबी जैसा घोटाला।
* बैंकों के तेजी से बढ़ते एनपीए के पीछे अधिकारियों की मिलीभगत तो नही।
* बीमा कंपनियों के भी क्लेम या अन्य मामलों में मनमानी भी तेजी से बढ़ रही।


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