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बासमती धान में से चावलों की निकासी में आई भारी कमी- चावलों में तेजी रहने की उम्मीद

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नई दिल्ली, (सुभाष भारती):
इस वर्ष सीजन के शुरूआती दौर से ही स्टाकिस्ट व निर्यातक बारीक चावल की खरीददारी में आ गये, जिसके चलते रूक-रूककर बाजार बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि धान की रोपाई सामान्य होने के बावजूद यील्ड में औसतन भारी कमी आ रही है तथा यही हालात मोटे धान व चावल में भी रहे।
यूपी, हरियाणा, पंजाब धान के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। इसके इलावा राजस्थान, एमपी से भी धान आता है। सरकारी आंकडों के मुताबिक धान की रोपाई बारीक व मोटे किस्म के 440 लाख हैक्टेयर जमीन के रकबे में हुई थी। जो गत वर्ष के लगभग समान ही रहा। इन सबके बावजूद अगस्त के महीने में इस बार पुरवईया हवा न बहने से धान की ग्रोथ कम हुई तथा सितम्बर के महीने से ही बरसात का पलायन हो गया जिसके चलते उत्पादकों में अनुमान से कहीं बहुत अधिक मिलिंग के बाद 1509, 1408, 1401 एवं 1121 प्रजाति वाले बासमती चावल कम निकल रहे हैं तथा पहले खेत के बाद ब्रोकन भी अधिक निकलने लगा है। यही कारण है कि राइस मिलें सेला, स्टीम व कच्चा चावल बाजार में मांग के अनुरूप देने में असमर्थ हो गई हैं। बाजार पर निर्यातकों का पूरी तरह से कब्जा हो गया है क्योंकि डोमेस्टिक मार्केट में चावल की मांग अनुकूल नहीं है जिसके चलते बढ़ते बाजार को तोडक़र खरीद करने लगते हैं तथा माल की कमी से मंदा ज्यादा दिन तक नहीं टिक पा रहा है। इस बार बारीक बासमती धान का उत्पादन 600 लाख टन से घटकर 400 लाख टन रह जाने का अनुमान है, जिसमें 235-240 मी. टन विभिन्न तरह के बारीक प्रजाति के चावल की सकल उपलब्धि हो पायेगी। पुराना स्टाक पहले से नहीं था, जिसके चलते एक सप्ताह के अंदर धीरे-धीरे बाजार घटता है तथा दो दिनों के अंदर ही घटे भाव से अधिक तेजी आ जाती है। अभी 1121 सेला चावल 6700 रूपये बिककर 7100 रूपये पर पहुंच गया। 1509 चावल 5700 रूपये गत सप्ताह बिककर 6200 रूपये की ऊँचाई पर जा पहुंचा।


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