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पंजाब के मुकाबले हरियाणा में बासमती का अधिक मूल्य मिलने से किसानों का रूख हरियाणा की तरफ

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- जिला संगरूर की मंडियों के किसानों को बासमती धान का पर्याप्त मूल्य न मिलने से किसान अपनी धान जिला पटियाला की पातड़ां व हरियाणा की मंडियों लिजाकर बेचने को मजबूर
(सुभाष भारती):
पंजाब की कैप्टन सरकार किसानों को खेती विभिन्नता अपनाने व धान के सीजन में किसानों की फसल का पर्याप्त दाम देने के दावे तो बहुत करती है, लेकिन दूसरी तरफ किसानों को बासमती धान का राज्य में पर्याप्त मूल्य न मिलने के कारण राज्य का किसान हरियाणा की मंडियों में अपनी बासमती धान की फसल बेचने को मजबूर है। यही नहीं संगरूर जिले के मुकाबले पटियाला जिले की मंडी पातड़ां में भी किसानों को बासमती का अधिक मूल्य मिल रहा है, जिस कारण संगरूर जिले के किसान अपनी धान की फसल को संगरूर जिले से बाहर लिजाकर बेचने के लिए मजबूर हैं। यह भी सत्य है कि आजकल जिला संगरूर के किसान अपनी बासमती धान हरियाणा की मंडियों गुल्ला-चीका मंडी, रतिया व जाखल मंडियों में बेचने में अधिक रूचि दिखा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला संगरूर की सीमा हरियाणा राज्य व पटियाला से लगती है। पंजाब के मुकाबले हरियाणा में किसानों को बामसती का दाम अधिक मिलता है। लहरागागा से लेकर खनौरी इलाके के अधिकतर किसान हरियाणा राज्य में ही बासमती धान को बेचने को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि किसानों को अपने बासमती धान हरियाणा की मंडियों में बेचकर 300-500 रूपये प्रति किवंटल अधिक मूल्य मिलता है।
गौर हो कि धान की 1509 किस्म जिला संगरूर में 2600 रूपये प्रति किवंटल बिक रही है, वहीं पातड़ां में व्यापारी इसका दाम 3000 रूपये, हरियाणा में 3200 रूपये तक दे रहे हैं। इसी प्रकार 1121 किस्म संगरूर जिले में 3100 रूपये प्रति किवंटल है तो पातड़ां में 3600 रूपये, हरियाणा में 3750 रूपये तक, मुच्छल धान का रेट संगरूर में 2700 रूपये प्रति किवंटल है तो पातड़ां में 3100 रूपये प्रति किवंटल और हरियाणा में 3300 रूपये प्रति किवंटल के रेट पर बिक रही है। बेशक हरियाणा व पातड़ां इलाके में अपनी बासमती धान लेकर जाने पर किसानों को ट्रैक्टर-ट्राली का खर्चा भी अलग से पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद भी किसान उन मंडियों में बासमती बेचने को प्राथमिकता देते हैं।


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