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खट्टर सरकार ने राज्य के राइस मिलरों को 580 करोड़ रूपये का अतिरिक्त लाभ देने के लिए पासवान को लिखा पत्र

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चंडीगढ़, (सुभाष भारती):
       राज्य सरकार ने पीडीएस चावल की वसूली के बाद राज्य सरकार को अपने स्टॉक का फिजीकल वैरीफिकेशन (पी.वी.) करने से रोकने के लिए राज्य के राइस मिलर्स पर चावल की कस्टम मिलिंग के लिए मानदंडों को अस्पष्ट करने के लिए दबाव डालकर 580 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुनाफे पर नजरें टिकाये हुए हैं।
       राइस मिलर्स की मजबूत लॉबी के दबाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पहले ही केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, कि कस्टम मिलिंग में धान से चावल की पैदावार के मानदंड को 67 किलोग्राम प्रति क्विंटल से घटाकर 64 किलोग्राम करें। एक ऐसा ही पत्र भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को राज्य सरकार द्वारा लिखा गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री खट्टर के विधानसभा क्षेत्र करनाल में बड़ी संख्या में बड़े राइस मिलर्स स्थित हैं।
        उन्होंने कहा कि यह बहुत कम संभावना है कि एफसीआई नियमों में ढील देगा क्योंकि उसे पंजाब के लिए बराबर छूट देनी होगी, जहां धान की खरीद हरियाणा के मुकाबले तीन गुणा है। मिलर्स राज्य सरकार पर अपने स्वयं के धन से यह लाभ प्रदान करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। मिलर्स उत्तर प्रदेश का उदाहरण दे रहे हैं, जहां धान की कुल खरीद मुश्किल से 3 लाख मीट्रिक टन है। सूत्रों ने कहा कि 10 महीने से कम समय में होने वाले राज्य विधानसभा के चुनावों से पहले मिलरों को उम्मीद है कि उनकी मांग राज्य सरकार द्वारा स्वीकार कर ली जाएगी।
        राइस मिलर्स के पास 58.5 लाख मीट्रिक टन राज्य खरीद एजेंसियों से संबंधित है, जिसके खिलाफ उन्हें कस्टम मिलिंग के बाद सरकार को 39.2 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करवाना है। अगर राइस मिलर्स की मांग को स्वीकार कर लिया जाता है, तो उन्हें पहले की सहमति वाली मात्रा से 1.76 लाख एमटी चावल सरकार को कम देना होगा, जिससे राज्य सरकार पर 580 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा।
        सूत्रों के मुताबिक, राज्य में लगभग 1100 मिलर्स हैं, जिनमें से 200 बड़े मिलर्स हैं। यदि मांग को स्वीकार कर लिया जाता है, तो उनमें से प्रत्येक को 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलना तय है। इसके अलावा, मिलर्स ने नवंबर में हुई बारिश के कारण देर से शुरू हुई मिलिंग का हवाला देते हुए बिना शुल्क लगाए 31 मार्च से 30 जून तक चावल की डिलीवरी की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
        सूत्रों ने कहा कि पीडीएस चावल सहित खराब गुणवत्ता वाले चावल उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से फिर से हरियाणा में आने शुरू हो गये हैं जबकि कुछ लालची मिलरों ने इसे अधिक लाभ कमाने के लिए ताजे मिलिंग किए चावलों में मिलाकर एफसीआई अधिकारीयों से सांठ-गांठ कर सरकारी अनाज स्टोर केन्द्रों में स्टोर करने का कार्य शुरू कर दिया है।
अक्टूबर में कुछ मिलरों से पीडीएस का चावल पकड़ा गया था जिसके बाद मिलर्स हड़ताल पर चले गए थे और सरकार को कस्टम मिलिंग शुरू करने के लिए एक शर्त के रूप में अपनी राइस मिलों की फिजीकल वैरीफिकेशन (पी.वी.) को रोकने के लिए मजबूर किया था।
       मिलर्स की मांग का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चारुनी ने आरोप लगाया कि मिलर्स ने पहले ही खरीद के समय धान में नमी के नाम पर किसानों का शोषण किया था और अब सरकार से लाभ का दावा कर रहे हैं। अगर सरकार मानदंडों में बदलाव करना चाहती है, तो यह खरीद के समय होना चाहिए। धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 19 प्रतिशत की जानी चाहिए।
        हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद गोयल ने कहा कि उन्होंने बेमौसमी हुई बारिश के दौरान धान खरीदा था। इससे धान की गुणवत्ता और उपज प्रभावित हुई। धान में नमी के कारण टूटा हुआ और क्षतिग्रस्त अनाज नष्ट हो गया। ऐसी परिस्थितियों में, हम मिलिंग के बाद एफसीआई को प्रति क्विंटल 67 किलोग्राम चावल वापस नहीं कर पा रहे हैं। यूपी सरकार ने हाल ही में नियमों में ढील दी है और इसे घटाकर 64 किलोग्राम चावल प्रति क्विंटल कर दिया है।
       मिलिंग के बाद चावल की डिलीवरी के लिए तीन महीने की अवधि बढ़ाने की मांग के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि अक्टूबर से 10 दिसंबर तक एफसीआई में वर्क टू रूल के कारण वह एफसीआई को केवल कुछ ही चावल के ट्रकों को अनलोड़ करने की अनुमति दी गई, जिसके परिणामस्वरूप डिलीवरी में देरी हुई।

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