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धान खरीद क्षमता 10 लाख मीट्रिक टन के पार

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कुरूक्षेत्र (सुभाष भारती): सरकार की ओर से तय क्षमता से अधिक धान खरीद कर स्टाॅक करने वाले राइस मिलरों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस मामले पर उपायुक्त के संज्ञान लिए जाने के बाद विभाग के अधिकारियों ने सख्ती शुरू कर दी है। विभाग की सख्ती को देखते हुए कई ऐसे राइस मिलरों की बेचैनी बढ़ गई है, जिन्होंने पहले ही तय क्षमता से अधिक धान खरीद कर स्टाक कर लिया था। यह ऐसे राइस मिलर हैं, जिन्हें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि वह उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर इसमें बढ़ोतरी करवा लेंगे। लेकिन उच्चाधिकारियों के ज्यादा बढ़ोतरी न करने पर उन्हें निराशा हुई है। अब यह अधिकारियों की कारवाई से बचने की जुगत लगाने में जुटे हैं। 
कुरूक्षेत्र में 204 राइस मिलों के लिए धान खरीद की क्षमता नौ लाख मीट्रिक टन तय की गई थी। नियमानुसार राइस मिल की मिलिंग क्षमता को देखते हुए उनके लिए धान खरीद का स्टाक लक्ष्य तय किया गया था। इनमें से कई बड़े और नामचीन राइस मिलरों ने खरीद शुरू होने से पहले ही अपनी मिल में स्टाॅक एकत्रित कर लिया था। एक अक्तूबर को खरीद शुरू होने पर इसे सरकारी रिकार्ड में भी दर्ज करवा लिया। इसके बाद यह मिलर बराबर धान खरीदते रहे, ऐसे में नियमानुसार उनकी क्षमता पूरी हो गई। लेकिन इसके बाद भी कई राइस मिलरों ने राज्यमंत्री की ओर से इस मामले पर बैठक बुलाने की बात कहकर धान खरीद जारी रखी। 
नौ लाख से बढ़कर 10.25 लाख मीट्रिक टन हुई खरीद क्षमता
जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता नियंत्रण मामले अधिकारी नरेंद्र सहरावत ने कहा कि मंगलवार को विभाग के उच्चाधिकारियों की चंडीगढ में बैठक हुई थी, बैठक में खरीद क्षमता को नौ लाख से बढ़ाकर 10.25 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। डीसी के आदेश पर सभी राइस मिलरों को भी जानकारी दे दी गई है कि वह तय नियमों से अधिक धान की खरीद न करें। अगर किसी राइस मिलर ने नियमों की अनदेखी करते हुए अधिक धान स्टाक किया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कारवाई की जाएगी। 
डीसी से भी की थी मुलाकात 
क्षमता बढ़ाने की मंांग को लेकर राइस मिलरों द्वारा डीसी डाॅ एसएस फुलिया से मुलाकात की थी। डीसी ने विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट लेते हुए उन्हें बताया था कि अभी तक सात लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। अभी दो लाख मीट्रिक टन बकाया है। इस क्षमता के पूरा होने के बाद इसे बढाया जा सकता है। अभी जिले भर में कई ऐसे राइस मिल हैं जो क्षमता से बहुत कम धान खरीद पाए हैं। 


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