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हरियाणा की मंडियों में अब कटेंगे मैनुअल गेट पास, किसानों को लगाना होगा आई.डी प्रूफ

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करनाल, (व्यापार समीक्षा संवाददाता):
अब मंडियों में पीआर धान के ऑनलाइन गेट पास की बजाये मैनुअली गेट पास कटेंगे। इसके पीछे कारण बताया गया है कि ऑनलाइन गेट पास सिर्फ नॉन एमएसपी फसलों के ही काटे जाएंगे, जिनके न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित नहीं किए गए हैं जबकि पीआर धान के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है जिसके चलते पीआर धान एमएसपी के दायरे में आती है इसलिए पीआर के लिए ऑनलाइन गेट पास नहीं कटेंगे। इससे किसका फायदा होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि किसान को गेट पास के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगने की कोई आवश्यकता नहीं होगी, वहीं धान खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। जिले के करीब 2.20 लाख एकड़ में पीआर धान लगी है लेकिन पैदावार औसत 20 से 25 किवंटल ही निकल रही है, जबकि आंकडों में 2 से 3 गुणा निकले तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
उधर धान की सरकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, इसके लिए हरियाणा मार्कीटिंक बोर्ड द्वारा कई कदम उठाये हैं ताकि प्रदेश के किसान की फसल पर काफी हद तक स्वयं ही रोक लग सके।
नये कदमों के मुताबिक प्रदेश सरकार ने प्रदेश के किसानों को फसल मंडी में लाते वक्त अपने साथ आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड या फिर ड्राइविंग लाइसेंस साथ लाना होगा ताकि उसकी फसल आसानी से सरकार खरीद सके। किसान के पास अगर 4 आईडी में से कोई भी नहीं है तो किसान को धान बेचने में परेशानी होना लाजिमी है। अगर सरकार इन नियमों में ढील देती है तो दूसरे प्रदेशों की धान की भरमार प्रदेश की मंडियों में हो जाएगी और प्रदेश के किसानों को धान बेचने में परेशानी होगी।

धान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा: सी.ए.
हरियाणा मार्कीटिंग बोर्ड के सी.ए. हरदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के किसानों द्वारा उगाई धान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। बस किसानों को अपने साथ आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस लाना होगा। इन कदमों से दूसरे प्रदेशों से आने वाली धान अपने आप ही रोक लग जाएगी। नियमों को कड़ाई से लागू किया जाएगा, वहीं प्रदेश की करीब 54 मंडियां ई-नेम बन चुकी है, वहीं करनाल नई अनाज मंडी के सचिव सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि मंडी में पीआर धान लेकर आने वाले किसानों के गेट पास ऑनलाइन न कटकर मैनुअली काटे जाएंगे और मंडी में कर्मचारियों की डयूटी लगा दी गई है।

करनाल मंडी में खरीदी गई थी 2017-18 में 38 लाख किवंटल धान:
पिछले वर्ष करनाल नई अनाज मंडी में करीब 38 लाख किवंटल धान खरीदी गई थी जबकि घरौंड़ा में 25 लाख किवंटल से अधिक, तरावड़ी में 24 लाख किवंटल से अधिक धान खरीदा गया था जो एशिया की सबसे बड़ी नई अनाज मंडी करनाल से काफी छोटी है, धान का रकबा भी काफी कम है। यही नहीं कई अन्य मंडियों में धान की आवक कई-कई लाख किवंटल बढ़ गई। जबकि पूरे जिले की फसलों की औसत निकाली जाए तो वह सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाती अर्थात जिले के खेतों में इतनी पैदावार हुई भी नहीं लेकिन मंडियों में धान की आवक दोगुनी हो गई जिस पर विचार करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार तो खेतों में पैदावार पिछले वर्ष की अपेक्षा प्रति एकड़ 5 से 8 किवंटल कम है।

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