GST Tax Awareness



सरकार ने ई-वे बिल का दुरूपयोग करने वाले व्यापारियों पर शिकंजा कसने की की तैयारी

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नई दिल्ली, (व्यापार समीक्षा संवाददाता):
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत ई-वे बिल सिस्टम का दुरुपयोग करने वाले व्यापारियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, जीएसटीएन नेटवर्क ने अपनी जांच में ये पाया कि कई व्यापारी ई-वे बिल जेनरेट होने के चार घंटे बाद ही उसे नियमित रूप से कैंसल कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि रोजाना देश में करीब 15 लाख ई-वे बिल बनते हैं, जिनमें से करीब एक लाख रोजाना कैंसल कर दिए जाते हैं। 
अधिकारी का कहना है कि अभी तक की जांच में पाया गया है कि कई व्यापारी जान-बूझकर ई-वे बिलों को रद्द कर रहे हैं। ये रद्दीकरण ई-वे बिल उत्पादन के चार घंटों के भीतर किया जा रहा है। ऐसे मामले भी पाए गए हैं जिनमें एक ही जीएसटीएन नंबर से 100 में से 99 ई-वे बिल रद्द किए गए हैं। इन मामलों पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और जीएसटीएन नेटवर्क ने जांच की शुरुआत कर दी है और इस पर भी गौर किया जा रहा है कि सिस्टम में कहां कमी है, जिसके चलते ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्र ने कहा कि लोहा, इस्पात, सीमेंट, सैनेटरी वस्तुओं और तांबे के तारों जैसे सामानों का आसानी से उपभोग किया जाता है और इन्हीं के ई-वे बिलों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाई गई है। अधिकारी ने कहा है कि ऐसे व्यापारी जीएसटीएन नंबर के आधार पर पहचाने जा रहे हैं और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
वहीं दूसरी ओर सरकार ने अब ई-वे बिल जारी करने के लिए उस ट्रांसपोर्टर का नाम देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके जरिये माल भेजा जा रहा है। यही नहीं, इसमें कुछ ऐसी सहूलियतें भी कर दी गई हैं, ताकि छोटे कारोबारी खुद अपना ई-वे बिल जारी कर सकें और इसके लिए उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट या अन्य प्रशिक्षित पेशेवरों की मदद न लेनी पड़े। जीएसटी नेटवर्क से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोमवार से ही देशभर में ई-वे बिल जारी करने की प्रक्रिया में सुधार कर दिया गया है। पहले कारोबारी ई-वे बिल जारी करने को लेकर पार्ट-ए स्लिप जेनरेट करने के लिए पार्ट-बी को अधूरा छोड़ देते थे। पार्ट-बी में ट्रांसपोर्टरों को जीएसटीएन से दी गई आईडी और अन्य जानकारी देनी होती है। पहले इस जानकारी के बिना भी बिल जारी हो जाता था, लेकिन अब पहले पार्ट-बी को भरकर सेव करना होगा, तभी पार्ट-ए जेनरेट होगा।

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